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हैवान फिल्म समीक्षा: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म का पूरा सच

📸 इमेज क्रेडिट: फिल्म मेकर्स | ⚖️ फेयर यूज़ नीति के तहत समीक्षार्थ उपयोग।

फिल्म का फर्स्ट हाफ टोटली सस्पेंस थ्रिलर स्टाइल में चलता है

दोनों एक दूसरे के आमने-सामने खड़े होते हैं। डार्क म्यूजिक है, अंधेरे का माहौल, शुरुआत अच्छी होती है। जिसने ओपम नहीं देखी है उसके लिए बहुत सारे कैरेक्टर्स हैं शक पैदा करने के लिए। पुलिस केस होता है और थोड़ा बहुत दिमाग चलाने का मौका मिल जाता है। फिल्म का फर्स्ट हाफ टोटली सस्पेंस थ्रिलर स्टाइल में चलता है। हैवान टाइटल अक्षय कुमार के लिए क्यों लिखा गया? वहां तक कहानी धीरे-धीरे बिल्ड की जाती है।

शुरू के एक डेढ़ घंटे में अक्षय के टोटल तीन-चार सीन है बस

यहां मास मसाला, फाइट सीन, एक्शन सीन का स्कोप थोड़ा कम है। सब कुछ साइकोलॉजिकल चलता है। दिमाग के अंदर हो रहा है। ऐसा नहीं है कि फिल्म में नाच गाना नहीं है बट सब कुछ ओल्ड स्टाइल है। स्क्रीन पे आंख जमा के रखना मुश्किल है। स्पेशली सेकंड हाफ में नींद की झपकी जरूर आएगी। यहां पे गौर करने वाली बात यह है कि शुरू के एक डेढ़ घंटे में अक्षय के टोटल तीन-चार सीन है बस। बाकी पूरे टाइम स्क्रीन पे सैफ़ अली खान नजर आते हैं।

प्रियदर्शन ने कुछ चेंज नहीं किया तो मेन हीरो सैफ़ अली खान ही हैं

अब क्योंकि जो ओरिजिनल फिल्म थी उसमें लीड मोहन लाल ने प्ले किया था। यह ब्लाइंड कैरेक्टर और प्रियदर्शन ने कुछ चेंज नहीं किया तो मेन हीरो सैफ़ अली खान ही हैं। अक्षय एक सपोर्टिंग रोल कर रहे हैं या फिर लंबा कैमियो भी बोल सकते हो आप। इनका काम बस इतना है कि जब फिल्म बोरिंग होने लग जाए तब स्क्रीन पर आकर लोगों को जगाना है। अक्षय के लुक्स खतरनाक लगते हैं लेकिन फिल्म में उनका इस्तेमाल ब्यूरो भी नहीं हुआ। सिर्फ आवाज के दम पर किसी का कितना डर बनाया जा सकता है।

2026 की सबसे आलसी फिल्म है ये

2026 की सबसे आलसी फिल्म है ये। इतने बड़े एक्टर से कुछ भी नया नहीं करवाया गया। सिर्फ खड़े होकर घूरने से फिल्म का कंटेंट राजसन नहीं बन जाएगा। सबसे खराब काम जो इन लोगों ने किया। शुरुआत से अक्षय का फेस रिवील कर दिया। जबकि पुरानी फिल्म में विलन 60% फिल्म में हिडन रहता है। मिस्ट्री बनी रहती है। ऊपर से हैवान जैसा टाइटल रखने के बाद भी अक्षय सिर्फ मुंह चला रहे हैं। हाथ पैर का इस्तेमाल बहुत कम किया गया। कम से कम थोड़ा मारकाट तो डाल ही सकते थे। इस फिल्म में प्रियदर्शन ने 0% क्रिएटिविटी डाली है। कोई मेहनत नहीं की। पुरानी फिल्म के डायलॉग से लेकर हैंडपंप की लोकेशन तक सेम है। पब्लिक इतनी बेवकूफ भी नहीं है।

हैवान का सबसे बड़ा सस्पेंस पता है क्या

मुझे नहीं पता इतनी हिम्मत कहां से लाते हैं अक्षय कुमार। इतना ओवर कॉन्फिडेंस जो 2026 में एक फ्रेम टू फ्रेम रीमेक फिल्म को सेलेक्ट कर रहे हैं। स्पेशली तब जब उस फिल्म का hindi डब्ड वर्जन YouTube पे मौजूद है। पूरी दुनिया उसे घर बैठ के फ्री में देख सकती है। हैवान का सबसे बड़ा सस्पेंस पता है क्या? अक्षय कुमार ने इस फिल्म को क्यों और कैसे साइन कर लिया? वो भी दो बैक टू बैक हिट देने के बाद। भले ही इस कहानी में सैफ़ अली खान ब्लाइंड कैरेक्टर होंगे लेकिन रियल लाइफ में अक्षय बिना देखे फिल्म कर रहे हैं। अपने पैर पे कुल्हाड़ी नहीं सीधा बुलडोजर दे मार रहा है। वैसे भी एक बात बोलूं ओपम खुद में कोई मास्टर्स सिनेमा नहीं है। उसका खुद का सस्पेंस कोई ज्यादा स्पेशल नहीं है। एक basic फिल्म का बोरिंग रीमेक है हैवान। अपने कमबैक ईयर में ऐसी कमजोर फिल्म साइन करके करियर पे ताला कैसे लगाना है? अगर इस पर फिल्म बनी तो अक्षय का ऑस्कर पक्का है।

हैवान को मिलेंगे पांच में से डेढ़ स्टार

पूरी फिल्म में अगर कुछ अच्छा है तो वो सैफ़ अली खान है। लेकिन 2016 में मोहन लाल का कैरेक्टर लोगों ने उतना जज नहीं किया। बट 2026 में फिल्म के ट्विस्ट इलॉजिकल लग सकते हैं। फ्रैंकली इस फिल्म को थिएटर में देखने का मुझे एक रीज़न ढूंढने से भी नहीं मिल रहा है। ओटीटी का वेट कर लो या YouTube पे ओरिजिनल फिल्म अभी तुरंत देख लो। हैवान को मिलेंगे पांच में से डेढ़ स्टार, एक सैफ़ अली खान के लिए, दूसरा अक्षय के लुक्स के लिए जिनको इस्तेमाल करने में प्रियदर्शन पूरी तरह फेल हो गए। नेगेटिव्स में प्रेडिक्टेबल कहानी, फिल्म की कछुए जैसी स्पीड, हैवान टाइटल को जस्टिफाई ना कर पाना और रीमेक वो भी सीन टू सीन। पब्लिक को ढेंचू ढेंचू मत समझो। तो फिर हनुमान अंश या मिर्जापुर क्या देखने वाले हो आप इस हफ्ते? कमेंट करके बताना जरूर। टेक केयर। बाय बाय।

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